“ बाटू ”

    Anup Singh Rawat
    By Anup Singh Rawat

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    “ बाटू ”


    बाटू,

    टेढू-मेढू बाटू,

    कखी उकाल, कखी उंदार,

    कखी सैणु, कखी धार-धार।


    बाटू,

    कु होलू जाणु,

    क्वी जाणु च अबाटू,

    त क्वी लग्युं च सुबाटू।


    बाटू,

    जाणु चा बटोई,

    क्वी हिटणु यखुली,

    त क्वी दगिड्यों दगिडी।


    बाटू,

    पैंट्यां छन देखा,

    क्वी च मैत आणु,

    त क्वी परदेश च जाणु।


    बाटू,

    वै जै ‘अनूप’ ब्वनु,

    जख बल मनख्यात हो,

    सुकर्म मा दिन रात हो।


    © अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”

    दिनांक – ०२-०२-२०१४ (इंदिरापुरम)

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