ये दिल्ली का बाजार मा, पैसों का बुखार मा

    Garhwali
    By Garhwali

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    ये दिल्ली का बाजार मा
    पैसों का बुखार मा

    कुड़ी पुंगड़ी छोड़ के
    बैठयां छो उडियार मा
    किराया कु कमरमा
    न जिंगला न गुठियार च
    गैरों की भीड़ मा

    न गाँव वालों की बहार च
    न दगड्यों की भीड़ च
    न मच्छों कु ठुंगार च
    न टिचरी कु पव्वा च
    न देशी की बहार च
    मतलबी छिन लोग इख
    यकुली छो परिवार मा

    न ब्वेई बाबा कु दुलार च
    न भे बन्दों कु प्यार च
    सगोडा पतोडा छुडणा की
    सजा मिलणी आज
    खेती बड़ी छोड़ी की
    रकरयादूँ छो बाजार मा
    रूखी सुखी खान्दु छो
    आम का आचार मा

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