जानिए वजह, उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा को हाई अलर्ट

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    By Garhwali

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    उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा को हाई अलर्ट, जानिए वजह
    वन्यजीव सुरक्षा के मद्देनजर महकमे ने उत्तराखंड में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। जिससे नए साल में वन्य वों को कोर्इ नुकसान ना पहुंचे।

     

    देहरादून, केदार दत्त। पुराने की विदाई और नए साल के स्वागत में वन विश्राम भवनों के साथ ही कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व समेत अन्य संरक्षित क्षेत्रों से लगे होटल-रिजॉर्ट में होने वाले जश्न की तैयारियों ने वन्यजीव महकमे के अफसरों के माथों पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। इसे देखते हुए वन्यजीव सुरक्षा के मद्देनजर महकमे ने राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। 

    वन रक्षक से लेकर सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) स्तर तक के कार्मिकों की छुट्टियां रद कर दी गई हैं। तीन जनवरी तक अपरिहार्य स्थिति में ही छुट्टियां दी जाएंगी। वन विश्राम भवनों और संरक्षित क्षेत्रों से लगे होटल-रिजॉर्ट पर खास निगाह रखी जाएगी तो उत्तर प्रदेश से लगी सीमाओं पर दोनों राज्यों के कार्मिक संयुक्त रूप से गश्त तेज करेंगे। 
    छह नेशनल पार्क, सात वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और चार कंजर्वेशन रिजर्व वाले उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा के लिहाज से साल का आखिरी पखवाड़ा भारी गुजरता है। वजह है वन विश्राम भवनों से लेकर संरक्षित क्षेत्रों से लगे होटल-रिजॉ‌र्ट्स में क्रिसमस से लेकर न्यू इयर ईव का जश्न। इसीलिए, इस वक्त को बेहद खतरनाक माना जाता है। वर्तमान में भी वहां शुरू हुई तैयारियां ने बेचैनी बढ़ा दी है। 
    असल में पुराने की विदाई और नए साल के स्वागत में होने वाले जश्न से जहां वन्यजीवों की जान सांसत में रहती है, वहीं शिकारियों के सक्रिय रहने की आशंका भी। इस सबको देखते हुए वन्यजीव महकमे ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक मोनीष मलिक के अनुसार सभी पार्कों, अभयारण्यों और कंजर्वेशन रिजर्व में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सभी संरक्षित क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी गई है। फील्ड कर्मियों को अपरिहार्य स्थिति में ही छुट्टियां दी जाएंगी। 
    इसके साथ ही वन विश्राम भवनों के अलावा जंगलों से लगे होटल-रिजॉर्ट पर खास नजर रहेगी। यही नहीं, उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्रों में उप्र और उत्तराखंड के वन्यजीव महकमे के कार्मिक संयुक्त रूप से गश्त करेंगे। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने बताया कि शिकारियों व तस्करों के सक्रिय होने की आशंका के मद्देनजर उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से जानकारियां साझा की जा रही हैं। मुखबिर तंत्र पर भी खास फोकस किया गया है। कहीं से किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर तुरंत इसका परीक्षण कराया जाएगा।

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