कोटद्वार में बनेगी बर्ड सेंचुरी, नाम होगा चैंपियन पार्क

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    कोटद्वार में बनेगी बर्ड सेंचुरी, चैंपियन पार्क होगा नाम
    पौड़ी जिले के कोटद्वार में बर्ड सेंचुरी बनार्इ जाएगी। इसका नाम चैंपियन पार्क होगा। मंत्री हरक सिंह रावत ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।

    कोटद्वार, जेएनएन। लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय बर्ड फेस्टिवल कोटद्वार क्षेत्र के लिए वरदान साबित होने जा रहा है। फेस्टिवल में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के बर्ड वॉचर्स से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद अब प्रदेश सरकार लैंसडौन वन प्रभाग में बर्ड सेंचुरी बनाने की तैयारी में है। बर्ड सेंचुरी का नाम जिम कार्बेट के हाथों में बंदूक की जगह कैमरा थमाने वाले पहले वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर फैड्रिक वाल्टर चैंपियन के नाम पर रखने की योजना है।

    वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने महकमे के अधिकारियों को इस संबंध में योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। लैंसडौन वन प्रभाग में आयोजित तीन दिनी बर्ड फेस्टिवल कई मायनों में क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। फेस्टिवल में सरवनदीप सिंह, हरीश कुमार कोहली, कृष्णा अवतार, अनूप शाह, सोहेल मदान, कल्याण सिंह सजवाण जैसे कई अन्य नामी-गिरामी पक्षी-प्रकृति प्रेमियों ने शिरकत की। वहीं यूएसए से पहुंचे सामंथा सिडेनी व माइकल ह्यूबनर ने इस फेस्टिवल में शिरकत कर कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।
    जंगलों में मौजूद है पक्षियों का बड़ा संसार
    पक्षी और प्रकृति प्रेमियों की प्रभाग के जंगलों के प्रति दिलचस्पी देखने के साथ ही प्रभाग के जंगलों में मौजूद पक्षियों के बड़े संसार को देखते हुए प्रदेश सरकार इस प्रभाग को बर्ड सेंचुरी के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। चैंपियन के नाम पर बनेगी बर्ड सेंचुरी प्रदेश सरकार लैंसडौन वन प्रभाग में बनने वाली इस बर्ड सेंचुरी का नाम लैंसडौन वन प्रभाग के दसवें प्रभागीय वनाधिकारी फैड्रिक वाल्टर चैंपियन के नाम पर रखने की योजना है। 
    जिम कार्बेट के हाथों में 'बंदूक' की जगह थमाया था 'कैमरा'
    फैड्रिक वाल्टर चैंपियन वे शख्स थे, जिन्होंने जिम कार्बेट के हाथों में 'बंदूक' की जगह 'कैमरा' थमाया था। कालागढ़ व लैंसडौन वन प्रभाग में प्रभागीय वनाधिकारी रहे एफ.डब्ल्यू. चैंपियन ने वर्ष 1935 में देश के पहले राष्ट्रीय पार्क (जिसे 1957 में जिम कार्बेट नेशनल पार्क नाम दिया गया) की स्थापना में भी अहम भूमिका का निर्वहन किया था। 1923-29 तक लैंसडौन वन प्रभाग और 1929-30 में कालागढ़ वन प्रभाग में बतौर प्रभागीय वनाधिकारी तैनात एफडब्ल्यू चैंपियन ने लैंसडौन में वर्ष 1881 में बने 'पाइन हाउस' में ही वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफ्स को फोटो पेपर पर उकेरा गया था। 
    'पाइन हाउस' में की थी डार्क रूम की स्थापना
    अपने कार्यकाल में उन्होंने 'पाइन हाउस' में डार्क रूम की स्थापना की थी, जहां वे कैमरे से खींचे गए वन्य जीवों के फोटो को फोटो पेपर पर उकेरा करते थे। उन्होंने पहली बार कैमरा ट्रैपिंग पद्धति से शूट किए गए बाघ के चित्र को फोटो पेपर पर उकेरा और यह फोटो वन्य जीव फोटोग्राफी का यह चित्र लंदन की एक प्रसिद्ध मैग्जीन के आवरण पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ था। वर्तमान में पाइन हाउस में ही कालागढ़ टाइगर रिजर्व फारेस्ट के प्रभागीय वनाधिकारी का आवास है। 
    देखने को मिलती है पक्षियों की ये प्रजातियां 
    प्रभाग में मौजूद पक्षियों का संसार ठंड का मौसम शुरू होते ही प्रभाग के जंगलों में बारटेल्ड ट्री क्रीपर, गूजेंडर, ब्राउन फिश आउल हो, बार विंग्ड फ्लाई कैचर स्त्राइक की चहचहाट शुरू हो गई है। साथ ही, प्रभाग के जंगलों में रेड बिल्ड लियोथ्रेक्स, ब्लैक स्ट्रोक, ग्रे हेडेड केनरी फ्लाई कैचर, ब्राउन हैडेड बारबेट, स्पॉटेड फ्रॉकटेल, ग्रेट हार्नबिल्स, ग्रे हार्नबिल्स, मलार्ड, नॉर्दन शॉवलर, मरगेंजर सहित कई अन्य पक्षियों की प्रजातियां आसानी से देखी जा रही हैं। 
    कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने बताया कि फेस्टिवल में पहुंचे पर्यटकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रभाग के जंगल पक्षियों के लिए बेहद मुफीद हैं। देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों ने प्रभाग को बर्ड सेंचुरी के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया है। मिले सुझावों के आधार पर वन महकमे से बर्ड सेंचुरी का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। बर्ड सेंचुरी का नाम चैंपियन पार्क के नाम पर रखा जाएगा।

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