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    • Anup Singh Rawat

      नै पहाड़ी जिला बणे द्यो सरकार

      By Anup Singh Rawat

      5/5 stars (2 votes)

      नै पहाड़ी जिला बणे द्यो सरकार रिखणी-बीरोंखाल धुमाकोट थैलीसैंण नैनीडांडा. मिलै की नै पहाड़ी जिला बणे द्यो सरकार. हम थैं नि चयेन्दु स्यु तुम्हारु कोटद्वार... जब राज्य पहाड़ी बणे त जिला किलै ना? सुपिन्या दिख्यां विकास का विकास कतै ना! रंगीला...
      • Anup Singh Rawat

        धन्यवाद तेरु रूड़ी

        By Anup Singh Rawat

        5/5 stars (2 votes)

        धन्यवाद तेरु रूड़ी धन्यवाद तेरु रूड़ी, त्यारा कारण परदेशी आई. टुप द्वी दिनों कु ही सै, अपड़ी देवभूमि भेंटे ग्याई... धन्यवाद तेरु रूड़ी, बाल बच्चों दगड़ी आई. छुट्यों का बाना ही, अपडू गौं मुलुक देखि ग्याई... धन्यवाद तेरु रूड़ी, ढोग्यां...
        • Anup Singh Rawat

          जीवन की गाड़ी धकेले रे मनखी

          By Anup Singh Rawat

          5/5 stars (2 votes)

          जीवन की गाड़ी धकेले रे मनखी जीवन की गाड़ी धकेले रे मनखी, बाटू च अभी बडू दूर. भाग मा त्यारा जू कुछ भी होलू, एक दिन त्वे मिललू जरूर. करम करदी जा, धरम करदी जा ................... अधर्म कु बाटू भेल ली जांदू, धर्म कु बाटू स्वर्ग मा जांदू. जैका जनि...
          • Anup Singh Rawat

            गीत : बाजूबंद गीत गाणी हो

            By Anup Singh Rawat

            5/5 stars (2 votes)

            गीत : बाजूबंद गीत गाणी हो दाथुड़ी लेकि घासा कु जांदी, ग्वरेल छोरों की बांसुरी सूणी, स्वामी की खुद मा खुदेणी हो. वा बैठी डाल्युं का छैल, घास घसेन्यों का गैल, बाजूबंद गीत गाणी हो ... कै दिन मैना बीती साल, स्वामी बौडी घार नि आया, पापी नौकरी...
            • Anup Singh Rawat

              गढ़वाली कविता : देवभूमि त्वे भट्याणी च

              By Anup Singh Rawat

              5/5 stars (2 votes)

              गढ़वाली कविता : देवभूमि त्वे भट्याणी च देवभूमि त्वे भट्याणी च, सूणी ले रे हे दगिड्या, कब बिटि की धै लगाणी च, बौडी आवा, लौटी आवा । 1। तिबारी डिंडाळी भट्याणी च, उरख्याली-गंज्याली भट्याणी च, बौडी आवा, लौटी आवा । 2। बांजी हूंदी पुंगड़ी...
              • Anup Singh Rawat

                “ बाटू ”

                By Anup Singh Rawat

                5/5 stars (2 votes)

                “ बाटू ” बाटू, टेढू-मेढू बाटू, कखी उकाल, कखी उंदार, कखी सैणु, कखी धार-धार। बाटू, कु होलू जाणु, क्वी जाणु च अबाटू, त क्वी लग्युं च सुबाटू। बाटू, जाणु चा बटोई, क्वी हिटणु यखुली, त क्वी दगिड्यों दगिडी। बाटू, पैंट्यां...
                • Anup Singh Rawat

                  ::: दहेज़ पर गढ़वाली कविता :::

                  By Anup Singh Rawat

                  5/5 stars (2 votes)

                  ::: दहेज़ पर गढ़वाली कविता ::: कनु फैल्युं च समाज मा, यु निर्भे दहेज़ कु रोग । नि लेणु-देणु दहेज़ कतै, झणी कब समझला लोग।। बेटी का होंद ही बाबाजी, जुडी जांदा तैयारी मा ।  सुपिन्यां सजाण लग्यान, अपरू मुख-जिया मारी का ।। कखि जु नि दे सकुणु...
                  • Anup Singh Rawat

                    दहेज़ पर गढ़वाली कविता

                    By Anup Singh Rawat

                    5/5 stars (2 votes)

                    दहेज़ पर गढ़वाली कविता   कनु फैल्युं च समाज मा, यु निर्भे दहेज़ कु रोग । नि लेणु-देणु दहेज़ कतै, झणी कब समझला लोग।। बेटी का होंद ही बाबाजी, जुडी जांदा तैयारी मा । सुपिन्यां सजाण लग्यान, अपरू मुख-जिया मारी का ।। कखि जु नि दे सकुणु...
                    • Anup Singh Rawat

                      गढ़वाली कविता : जग्वाल

                      By Anup Singh Rawat

                      5/5 stars (2 votes)

                      गढ़वाली कविता : जग्वाल   कब बिटि कन्ना छावा हम लोग जग्वाल। और झणी कब तक कन्न होरी जग्वाल। गौं-गौं मा सुबिधा होली कन्ना जग्वाल। होलू चौमुखी विकास बल कन्ना जग्वाल। स्कूल मा होला खूब गुरूजी कन्न जग्वाल। अस्पताल मा होला डॉक्टर कन्ना...
                      • Anup Singh Rawat

                        नौकरी का बाना

                        By Anup Singh Rawat

                        5/5 stars (2 votes)

                        नौकरी का बाना घर गौं मुल्क छोड्यों च, ईं पापी नौकरी का बाना। छौं दूर परदेश मा मी हे, निर्भे द्वी रुप्यों का बाना। मेरी सुवा घार छोड़ी च, ब्वे बुबों से मुख मोढ्यों च। ईं गरीबी का बाना कनु, अपड़ो से नातू तोड्यों च। दिन रात ड्यूटी कनु...

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