बेटी बचाओ - मिशन “गुल्लक गुडिया”

बेटी बचाओ - मिशन “गुल्लक गुडिया”

बेटी बचाओ - मिशन “गुल्लक गुडिया”

 

जीना है उसे भी इस दुनिया में,

कोई तो उसकी पुकार सुन लो..

बोझ नहीं बनेगी वो तुम पर,

थोड़ा ही सही मगर प्यार दे दो...

 

बेटा नहीं, बेटी है गर्भ में,

आधुनिक दुनिया में जान लिया..

जन्म से पहले ही उसको,

क्यों मारने का ठान लिया...

 

गर्भ में जो न मार सके तो,

पैदा होते ही उसे फेंक दिया..

ज़माने को ख़बर न हो उसकी,

अंधेरी रातों का सहारा लिया...

 

अगर कोई उसको उठा कर,

पाल-पोष कर बढा रही है..

तो कुछ दरिंदों की नजर,

मासूम सी जान पर रही है...

 

वो तो बस इस जहां में,

सुकून से जीना चाहती है.

मौका दो उसके सपनों को,

वो उडान भरना चाहती है...

 

पापा का सर पर हाथ,

माँ की उसको गोद चाहिए,

भाइयों के संग खेलना है,

प्यारा सा परिवार चाहिए...

 

बेटी पर ही क्यों पाबंदी,

रीति-रिवाज, संस्कारों में..

जीने दो उसको अपना जीवन,

न बंद करो उसे दीवारों में...

 

इतिहास के पन्नों को पलटो,

नारी की महिमा जान जाओगे..

हर रूप में उसने योगदान दिया,

शायद तब उसको बचाओगे...

 

© अनूप सिंह रावत “गढ़वाली इंडियन”

दिनांक : २८-१२-२०१६ (बुधवार)

ग्वीन, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)

इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)

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